अवैध कोयला से संचालित हो रहे एक दर्जन चिमनी भट्ठा, खनन विभाग और पुलिस की चुप्पी पर सवाल
गोमिया/डेस्क
बेरमो अनुमंडल के रहावन और जगेश्वर विहार थाना क्षेत्र में करीब दर्जन चिमनी भट्ठा संचालित हैं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इन भट्ठों में अवैध कोयला और नदी के बालू का उपयोग धड़ल्ले से किया जा रहा है। चिमनी मालिकों को सस्ते दामों पर अवैध कोयला और अन्य संसाधन आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं, जिससे इन क्षेत्रों में चिमनी भट्ठों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कोयला तस्कर को भी नजदीक में कोयला बेचने की सुविधा मिल जा रही है और चिमनी भट्ठा के मलिकों को कोयला। दोनों मिलकर प्रकृति का दोहन कर रहे हैं। वहीं स्थानीय पुलिस और खनन विभाग की चुप्पी सवाल खड़े कर रही है।
जानकारों का कहना है कि रहावन, हुरदाग और तिलैया इलाके में करीब 10 से 12 चिमनी भट्ठे संचालित हो रहे हैं। इनमें से दो-तीन चिमनी भट्ठा के मालिक हजारीबाग के इचाक क्षेत्र के बताए जाते हैं, जबकि कुछ स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों से जुड़े हैं। आश्चर्यजनक रूप से, स्थानीय पुलिस और खनन विभाग इस पर पूरी तरह चुप्पी साधे हुए है, जिससे अवैध कारोबारियों को खुली छूट मिल रही है।
प्राकृतिक संसाधनों का दोहन और सरकारी राजस्व को नुकसान
इन अवैध चिमनी भट्ठों के कारण न सिर्फ प्राकृतिक संसाधनों का भारी दोहन हो रहा है, बल्कि सरकार को भी राजस्व का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। अवैध कोयले के इस्तेमाल से जहां चिमनी मालिक मालामाल हो रहे हैं, वहीं पर्यावरण को भी गंभीर क्षति पहुंच रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को जल्द से जल्द इन अवैध चिमनी भट्ठों पर कार्रवाई करनी चाहिए। यदि समय रहते इस पर अंकुश नहीं लगाया गया तो इससे न केवल पर्यावरणीय संकट बढ़ेगा बल्कि सरकार को भी बड़े पैमाने पर राजस्व की हानि होगी।
प्रशासन की भूमिका पर सवाल
पुलिस और खनन विभाग की चुप्पी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह महज लापरवाही है या फिर इस अवैध कारोबार में मिलीभगत का मामला है? प्रशासन की निष्क्रियता से अवैध कारोबारियों के हौसले बुलंद हैं। अब देखना यह है कि संबंधित विभाग इस मामले में कब तक कार्रवाई करता है, या फिर यह अवैध कारोबार इसी तरह फलता-फूलता रहेगा?
