करमा पर्व: झारखंड की संस्कृति और प्रकृति का जश्न, बेरमो में धूमधाम से मनाया गया
बेरमो/तेनुघाट/नावाडीह/खेतको
बेरमो अनुमंडल के तेनुघाट, गोमिया, सवांग, फुसरो, नावाडीह, पेटरवार और आसपास के इलाकों में नौ दिवसीय करमा पर्व का आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय लोगों ने बड़े ही उत्साह और हर्षोल्लास के साथ भाग लिया. यह पर्व झारखंड की संस्कृति और प्रकृति को दर्शाता है, जिसमें लोग अपने पारंपरिक गीतों, नृत्यों और पूजा-अर्चना के माध्यम से करम बाबा की पूजा करते हैं.
इस पर्व में महिलाएं और युवतियां अपने भाइयों की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए करम बाबा से प्रार्थना करती हैं. इस वर्ष लगातार बारिश के बावजूद, लोगों के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखाई दी.
महाराष्ट्र में भी मनाया गया करमा पर्व
झारखंड के प्रवासी मजदूरों द्वारा महाराष्ट्र के नवी मुंबई बेलापुर सेक्टर 20 में भी करमा पर्व मनाया गया. इस संबंध प्रवासी मजदूर धर्मेंद्र महतो ने जानकारी दी है कि झारखंड के जो लोग यहां रहते हैं वे सभी मिलकर करम पर्व को धूमधाम से मनाया. यहां के स्थानीय लोगों ने भी इस पर्व में भाग लिया और झारखंडी संस्कृति को बढ़ावा देने में सहयोग किया.

पेटरवार प्रखंड के खेतको, चलकरी, चाँपी, मायापुर, अम्बा टोला, चांदो और आसपास के इलाकों में भी करमा पर्व धूमधाम से मनाया गया. यहां की युवतियों ने निर्जला उपवास कर अपने भाइयों के लिए करमदेव का उपासना किया.
करमा पर्व का महत्व
करमा पर्व झारखंड की संस्कृति और प्रकृति के बीच गहरे संबंध को दर्शाता है। यह पर्व लोगों को प्राकृतिक संरक्षण के प्रति जागरूक करता है और सामाजिक सद्भावना को बढ़ावा देता है.
मौके पर उपस्थित लोगों ने कहा कि यह पर्व हमें अपनी संस्कृति और पारंपरिक मूल्यों को बचाने का अवसर प्रदान करता है। हमें अपनी नई पीढ़ी को भी इस पर्व के महत्व के बारे में बताना चाहिए ताकि वे भी अपनी संस्कृति को जानें और उसका सम्मान करें.
