Homeबोकारोकामरेड श्याम सुंदर महतो को अंतिम विदाई में उमड़ा जन सैलाब

कामरेड श्याम सुंदर महतो को अंतिम विदाई में उमड़ा जन सैलाब

कामरेड श्याम सुंदर महतो को अंतिम विदाई में उमड़ा जन सैलाब
गोमिया/अनंत कुमार
माकपा के पूर्व राज्य कमेटी सदस्य एवं झारखंड राज्य किसान सभा के उपाध्यक्ष, किसानों-मजदूरों की बुलंद आवाज कहे जाने वाले कामरेड श्याम सुंदर महतो को बुधवार को नम आंखों से अंतिम विदाई दी गई। उनके निधन से गोमिया ही नहीं, बल्कि पूरे बोकारो जिले में किसान आंदोलन और वामपंथी राजनीति को गहरा आघात पहुंचा है। उनके साथ किसानों के संघर्ष की एक सशक्त, ईमानदार और प्रतिबद्ध पीढ़ी का अंत हो गया।
कामरेड श्याम सुंदर महतो पिछले कई महीनों से अस्वस्थ चल रहे थे। 15 दिसंबर को उन्हें सेवा सदन, गोमिया में भर्ती कराया गया था, जहां से स्थिति गंभीर होने पर बेहतर इलाज के लिए रिम्स, रांची रेफर किया गया। 16 दिसंबर को उन्होंने रिम्स में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर फैलते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
बुधवार को गोमिया प्रखंड अंतर्गत डुमरी बिहार स्थित उनके आवास से निकली शव यात्रा में सैकड़ों की संख्या में लोग शामिल हुए। “कामरेड श्याम सुंदर महतो अमर रहें” और “लाल झंडा ज़िंदाबाद” जैसे नारों के बीच वातावरण गमगीन हो उठा। हर वर्ग के लोग—किसान, मजदूर, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग—अपने प्रिय नेता को अंतिम विदाई देने पहुंचे। इसके बाद बोकारो नदी के तट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया।

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कामरेड श्याम सुंदर महतो को एक मिलनसार, सादगीपूर्ण और संघर्षशील नेता के रूप में याद किया जाएगा। उन्होंने जीवन भर लाल झंडे के नीचे रहकर किसानों और मजदूरों के हक की लड़ाई लड़ी। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने कभी अपने सिद्धांतों और नीतियों से समझौता नहीं किया। सत्ता और सुविधाओं से दूर रहकर वे हमेशा आमजन के बीच रहे।
पत्रकारों से भी उनके आत्मीय और सम्मानजनक संबंध थे। वे हमेशा संवाद और लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखते थे। क्षेत्र की हर बड़ी जनसमस्या—भूमि, विस्थापन, मजदूरी, स्वास्थ्य और शिक्षा—में वे अग्रिम पंक्ति में खड़े नजर आते थे।
उनके निधन से जो शून्य पैदा हुआ है, उसे भर पाना आसान नहीं होगा। मगर उनके संघर्ष, विचार और सादगीपूर्ण जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बने रहेंगे। क्षेत्रवासियों ने एक स्वर में कहा कि कामरेड श्याम सुंदर महतो भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके विचार और संघर्ष हमेशा जीवित रहेंगे।

अंतिम विदाई देने वालों में गोमिया के पूर्व विधायक लंबोदर महतो, मंत्री योगेंद्र प्रसाद महतो के भाई चित्रगुप्त महतो, माकपा राज्य कमेटी सदस्य रामचंद्र ठाकुर, गोमिया बीडीओ महादेव कुमार महतो, सीएचसी प्रभारी डॉ. जितेंद्र कुमार, माकपा जिला सचिव भागीरथ शर्मा, राज्य कमेटी सदस्य प्रदीप कुमार विश्वास, राजकुमार गोराई, सियारी पंचायत मुखिया रामवृक्ष मुर्मू, पूर्व प्रमुख गुलाबचंद हंसदा, भाकपा जिला सचिव गणेश महतो, माकपा नेता राकेश कुमार, विनय महतो, श्याम बिहारी सिंह ‘दिनकर’, अख्तर खान, मनोज पासवान, रेनू दास, अनिल बाउरी, सत्यनारायण महतो, आर.एन. सिंह, सकुर अंसारी, आजसू नेता इंद्रनाथ महतो समेत अनेक राजनीतिक, सामाजिक और जनसंगठन से जुड़े लोग शामिल रहे।

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