गोमिया। दीपक पासवान
अपने पति की लंबी आयु एवं बेहतर स्वास्थ्य की कामना के लिए सुहागिन महिलाएं श्रृंगार कर वट सावित्री का विधिवत पूजन किया. इधर गोमिया, ससबेडा, स्वांग, होसिर, साड़म, कथारा, जारंगडीह सहित विभिन्न क्षेत्रों में सुहागिन महिलाएं वट सावित्री का पूजन किया. पुजारी शिवम शास्त्री ने बताया कि सर्वप्रथम कलश स्थापन, गणेश पूजन, पंच देवता पूजन, नवग्रह पूजन, सती सत्यवान एवं वट सावित्री की विधिवत पूजन की गई. इसमें सुहागिन महिलाएं फल फूल व श्रृंगार के सामान अर्पित कर मौली धागा से वट वृक्ष की 108 बार परिक्रमा करती है. वट वृक्ष की जड़ को भगवान ब्रह्मा, तने को भगवान विष्णु एवं पत्तों को भगवान भोले शंकर के स्वरूप को माना जाता है. उन्होंने सुहागिन महिलाओं को पौराणिक कथा सुनाते हुए कहा कि सत्यवान एवं सावित्री के विवाह होने के उपरांत दोनों का दांपत्य जीवन खुशहाल था. किंतु एक दिन भोजन बनाने के लिए सत्यवान लकड़ी लाने के लिए जंगल गया था, कि अचानक उसके सिर में पीड़ा होने लगी और उसकी मृत्यु हो गई. सत्यवान की मृत्यु के बाद यमराज उसे यमलोक ले जा रहे थे. उसके पीछे-पीछे सत्यवान की पत्नी सावित्री भी चल पड़ी. यमराज द्वारा सावित्री को बार-बार लौट जाने के लिए कहा गया. किंतु सावित्री नहीं लौट रही थी. इस क्रम में यमराज ने सावित्री की पतिव्रता को देख वरदान दिया कि तुम सौ पुत्रों की मां बनोगी. इस वरदान मिलने के बाद भी सावित्री यमराज के पीछे चलती ही रही. यमराज क्रोधित होकर कहा कि तुझे सौ पुत्रों का वरदान दिया हूँ, इसके बावजूद भी पीछे क्यों आ रही हो. यह बात सुनकर सावित्री ने कहा कि जब आप पति के प्राण को ही ले जा रहे हैं, तब कैसे सौ पुत्रों की मां बनूंगी. अंतत: यमराज ने सत्यवान का प्राण लौटा दिया. उसी समय से हर सुहागिन महिलाएं वट सावित्री की पूजा अर्चना करती है.
जारंगडीह में सुहागिनों ने वट सावित्री का पूजन किया
जारंगडीह स्थित मां बनासो मंदिर में सुहागिनों ने अपने पति की लम्बी उम्र और अखंड सौभाग्य के लिए वट सावित्री की विधिवत रूप से पूजन किया. बृहस्पतिवार की अहले सुबह से ही पूजन के लिए यहां मंदिर प्रांगण में स्थित वट वृक्ष के नीचे सुहागिनों की काफी संख्या में भीड़ जुटी. जहां राजू पंडित ने सुहागिन महिलाओं को वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पूजा अर्चना कराया. वट सावित्री की पूजा को लेकर बनासो मंदिर में काफी संख्या में महिलाओं की भीड़ उमड़ पड़ी.