Homeबोकारोचाईबासा : कच्चे बांध टूटने से किसानों के खेत का हुआ नुकसान

चाईबासा : कच्चे बांध टूटने से किसानों के खेत का हुआ नुकसान

चाईबासा : कच्चे बांध टूटने से किसानों के खेत का हुआ नुकसान
गुवा
सेल (स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड) की गुवा खदान में रानी चुआं क्षेत्र में बने कच्चे बांध के टूटने से किसानों को भारी नुकसान हुआ है. इस बांध के टूटने से लाल मिट्टी और मुरुम (मिट्टी के टुकड़े) बहकर किसानों के खेतों में घुस गए, जिससे उनकी फसलें और जमीन प्रभावित हुई है.

गुवा खदान के रानी चुआं डम्प एरिया से बहने वाली लाल मिट्टी और मुरुम सारंडा जंगल और कोयना नदी को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं. इस इलाके के हजारों पेड़ पहले ही नष्ट हो चुके हैं, और नदी के किनारे बसे दर्जनों गांवों के ग्रामीणों का जीवन भी खतरे में पड़ गया है. तीन साल पहले भी इस तरह की घटना हुई थी, जिससे प्रभावित गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों ने गुवा खदान तक पैदल मार्च किया था. इसके बाद खदान प्रबंधन ने वादा किया था कि लगभग 3 करोड़ रुपये की लागत से आरसीसी गार्डवाल का निर्माण कराया जाएगा, लेकिन आज तक यह कार्य पूरा नहीं हुआ.

सारंडा पीढ़ के मानकी लागुड़ा देवगम, राजाबेड़ा के मुंडा जामदेव चाम्पिया, और जामकुंडिया के मुंडा कुशु देवगम ने आरोप लगाया है कि गुवा प्रबंधन के अधिकारी हर साल जंगल के पत्थरों से कच्चा गार्डवाल बनाकर लाखों रुपये की अवैध कमाई कर रहे हैं, जबकि वन, पर्यावरण, और ग्रामीणों के खेतों को बंजर बना रहे हैं.

ग्रामीणों ने इस मामले को लेकर दो बार जांच करवाई थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. अब ग्रामीणों ने चंदा कर राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) में मामला दायर करने का फैसला किया है और न्याय मिलने तक लड़ाई जारी रखने की घोषणा की है. इसके लिए दिल्ली के पर्यावरण विशेषज्ञों से भी मदद ली जाएगी.

लागुड़ा देवगम ने बताया कि गुवा प्रबंधन की इस लापरवाही के कारण जंगल और पर्यावरण नष्ट हो रहे हैं, और ग्रामीणों को सिर्फ बीमारी मिल रही है, जबकि नौकरी का लाभ बाहरी लोगों को दिया जा रहा है. ग्रामीण इस दोहरी नीति को अब और बर्दाश्त नहीं करेंगे.

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