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झारखंड मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना में धांधली का बड़ा मामला सामने आया: एक ही बैंक खाते से 95 बार आवेदन, उपायुक्त ने कड़ी कार्रवाई का निर्देश दिया

बोकारो: झारखंड मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना में धांधली का बड़ा मामला सामने आया: एक ही बैंक खाते से 95 बार आवेदन, उपायुक्त ने कड़ी कार्रवाई का निर्देश दिया
डेस्क/सुरेन्द्र

पलामू जिले में राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना झारखंड मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना (JMMSY) के तहत एक बड़ा घोटाला सामने आया है। उपायुक्त श्रीमती विजया जाधव के निर्देश पर शुरू किए गए भौतिक सत्यापन में खुलासा हुआ है कि एक ही बैंक खाता नंबर का इस्तेमाल कर 95 बार अलग-अलग नामों से आवेदन किया गया है। यह सभी आवेदन पलामू जिले के डालटंनगंज स्थित मेदनीनगर के सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर) से किए गए हैं।

मामले की मुख्य बातें:
एक ही बैंक खाते का दुरुपयोग:

सत्यापन में पता चला कि इंडसइंड बैंक के खाता नंबर 100253387047 का इस्तेमाल कर 95 बार अलग-अलग नामों से आवेदन किया गया है।

खाता धारक का नाम यूसुफ है, जिसका पता पश्चिम बंगाल के उत्तरदिनाजपुर जिले के बड़ाखांती, पतागोड़ा के रूप में दर्ज है।

फर्जी राशन कार्ड का इस्तेमाल:

आवेदन में दर्ज राशन कार्ड नंबर भी फर्जी पाए गए हैं। जिला आपूर्ति पदाधिकारी ने इसकी पुष्टि की है।

सभी आवेदनों में उपनाम के रूप में किस्कू, हांसदा और मुर्मू जोड़े गए हैं, जो संदिग्ध लगते हैं।

सीएससी की भूमिका पर सवाल:

यह सभी आवेदन डालटंनगंज के मेदनीनगर स्थित सीएससी वीएलई श्री सुमीत कुमार (आईडी संख्या: 542316220013) के माध्यम से किए गए हैं।

21 नवंबर 2024 को एक ही दिन में कई आवेदन दाखिल किए गए हैं, जो संदेह पैदा करता है।

उपायुक्त की कार्रवाई:
उपायुक्त श्रीमती विजया जाधव ने खाता धारक और संबंधित लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया है।

साथ ही, सीएससी वीएलई श्री सुमीत कुमार की भूमिका की जांच की जा रही है।

योजना के तहत मिले कुल 11,200 डुप्लीकेट आवेदन का पुनः भौतिक सत्यापन कराया जा रहा है। इसके लिए आंगनबाड़ी कर्मियों को जिम्मेदारी दी गई है।

योजना के बारे में:
झारखंड मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना (JMMSY) राज्य सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका उद्देश्य गरीब और वंचित वर्ग की महिलाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करना है। इस योजना के तहत पात्र लाभुकों को सीधे उनके बैंक खाते में राशि हस्तांतरित की जाती है। हालांकि, इस तरह के घोटाले योजना की पारदर्शिता और प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करते हैं।

उपायुक्त की कड़ी कार्रवाई और पुनः सत्यापन की प्रक्रिया से यह उम्मीद की जा रही है कि ऐसे घोटालों पर अंकुश लगेगा और योजना का लाभ सही लाभुकों तक पहुंचेगा। साथ ही, इस मामले ने सीएससी और अन्य संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की आवश्यकता को भी रेखांकित किया है।

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