झुमरा पहाड़ में कोयला तस्करी का गोरखधंधा, नक्सली विवेक की है तलाश
गोमिया
झारखंड के उग्रवाद प्रभावित झुमरा पहाड़ की तलहटी में बसे पचमो और उसके आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने पर कोयला तस्करी का गोरखधंधा फल-फूल रहा है। बेरमो अनुमंडल अंतर्गत रहावान ओपी थाना क्षेत्र के बघरैया, महतोहिर और अलकुसिया क्षेत्र में 20 से 25 अवैध माइंस बनाये गए हैं। यहां कभी भी जानमाल की क्षति हो सकती है। लेकिन प्रशासन की नींद तब खुलेगी जब घटना हो जाएगी। यहां शाम ढलते ही तस्करों की गतिविधियां तेज हो जाती हैं। कोयले को जमा करने के बाद ट्रैक्टरों के जरिए झुमरा गांव होते हुए चतरोचट्टी और विष्णुगढ़ के रास्ते बाहर की मंडियों में भेजा जा रहा है।
पुलिस की मिलीभगत का आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह अवैध व्यापार पुलिस की नाक के नीचे और उसकी शह पर चल रहा है। बिना पुलिस की सहमति के कोयले का एक भी ढेर नहीं खपाया जा सकता है। बड़े पुलिस अधिकारियों की चुप्पी ने तस्करों के हौसले और बढ़ा दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार प्रशासन से शिकायत की गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
माओवादी गतिविधियों का गढ़ रहा इलाका
झुमरा पहाड़ और पचमो इलाका लंबे समय से माओवादी गतिविधियों का केंद्र रहा है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) नक्सलियों के आर्थिक स्रोतों को खत्म करने के लिए लगातार छापेमारी कर रही है, लेकिन कोयला तस्कर उनकी कोशिशों को कमजोर करने का काम कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कोयला तस्करी से होने वाली कमाई का एक बड़ा हिस्सा माओवादियों तक पहुंचता है, जिससे वे अपनी गतिविधियों को संचालित करते हैं। वहीं जांच एजेंसियों का मानना है कि नक्सली विवेक झुमरा पहाड़ पर ही शरण ले रखी है, जिसकी तलाश जारी है।
स्थानीय लोगों में डर और आक्रोश
क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि कोयला तस्करी से न केवल सरकारी खजाने को करोड़ों का नुकसान हो रहा है, बल्कि इलाके में अपराध भी बढ़ रहे हैं। तस्करों की बढ़ती ताकत से रात होते ही ग्रामीणों की नींद हराम हो जाती है। क्योंकि ट्रैक्टर रातभर कोयला ढोने में लगी रहती है। किसी ने भी विरोध किया तो उन्हें वे धमकाते हैं। कई बार विरोध करने वाले लोगों के साथ मारपीट तक की घटनाएं हो चुकी हैं।
सरकार और प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
झुमरा पहाड़ जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह खुलेआम कोयला तस्करी होना सरकार और प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। झारखंड सरकार द्वारा अवैध खनन पर रोक लगाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है।
झुमरा पहाड़ जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्र में कोयला तस्करी केवल एक अवैध धंधा नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरा है। आखिर वे कौन लोग हैं जो न केवल कोयले के इस अवैध व्यापार को चला रहे हैं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा उपन्न कर रहे हैं। यदि इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है।
