स्टार लिंक सेटेलाइट इंटरनेट भारत में आने से क्या फायदा है
डेस्क/झारखंड न्यूज़ लाइव/सुरेन्द्र
भारत में स्टारलिंक इंटरनेट सेवाओं को लॉन्च करने की प्रक्रिया तेज़ हो रही है। कंपनी ने हाल ही में भारतीय सरकार की डेटा स्थानीयकरण और सुरक्षा संबंधी शर्तों का पालन करने पर सहमति जताई है, जो सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवा के लिए आवश्यक लाइसेंस (GMPCS) प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस लाइसेंस के तहत सैटेलाइट इंटरनेट प्रदाता भारत में अपनी सेवाओं का संचालन कर सकते हैं।
हालांकि, कुछ तकनीकी बाधाओं के चलते स्टारलिंक ने सरकार से कुछ नियमों में छूट मांगी है, जिन पर विचार किया जा रहा है। सरकार और स्टारलिंक के बीच समझौते की संभावनाएं बन रही हैं ताकि लाइसेंसिंग प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके। कंपनी को भारत में सेवा शुरू करने से पहले स्थानीय गेटवे और अन्य सुरक्षा प्रावधानों का पालन करना होगा।
वर्तमान में, भारत में वनवेब और जियो-एसईएस जैसी कंपनियों को लाइसेंस प्राप्त है, और स्टारलिंक के अलावा अमेज़न का प्रोजेक्ट कूपर भी लाइसेंस के लिए आवेदन कर चुका है। इन सेवाओं के शुरू होने से भारत के दूरदराज के क्षेत्रों में तेज़ इंटरनेट कनेक्टिविटी मिलने की संभावना है।
भारत में स्टारलिंक इंटरनेट से कई फायदे हो सकते हैं, खासकर ग्रामीण और दूरदराज़ के क्षेत्रों में, जहां पारंपरिक इंटरनेट सेवा सीमित है। इसके संभावित लाभों में शामिल हैं:
रural Connectivity: भारत के लगभग 2.5 लाख गांवों में तेज़ और विश्वसनीय इंटरनेट की सुविधा मिल सकती है, जिससे शिक्षा, टेलीमेडिसिन, और डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा मिलेगा।
आर्थिक विकास: ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट के प्रसार से डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा और नए व्यवसाय और रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे।
तकनीकी प्रगति: भारत में सैटेलाइट इंटरनेट तकनीक के इस्तेमाल से नवाचार और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में विकास होगा।
हालांकि, इसकी लागत और विदेशी डेटा स्टोरेज के संभावित जोखिम जैसे मुद्दे भी विचारणीय हैं। सरकार इस सेवा के स्थानीय उपयोग के लिए सुरक्षा और नियामक पहलुओं पर काम कर रही है।

