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20 मई की आम हड़ताल स्थगित, 9 जुलाई को होगा मजदूरों का निर्णायक प्रदर्शन – ट्रेड यूनियनों ने किया ऐलान

20 मई की आम हड़ताल स्थगित, 9 जुलाई को होगा मजदूरों का निर्णायक प्रदर्शन – ट्रेड यूनियनों ने किया ऐलान

बेरमो/डेस्क
केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और स्वतंत्र फेडरेशनों के संयुक्त मंच, झारखंड ने स्पष्ट किया है कि 20 मई 2025 को प्रस्तावित मजदूरों की देशव्यापी आम हड़ताल को स्थगित करने का निर्णय “शासकों और मालिकों के लिए राहत नहीं” है, बल्कि यह देशहित में लिया गया एक जिम्मेदार और रणनीतिक कदम है। अब यह हड़ताल आगामी 9 जुलाई 2025 को आयोजित की जाएगी। संयुक्त मंच ने कहा है कि यह फैसला हाल में पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले और उसके बाद उत्पन्न राष्ट्रीय स्थिति की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
सीटू (CITU) के प्रदेश उपाध्यक्ष रामचंद्र ठाकुर ने बताया, “झारखंड समेत पूरे देश में हड़ताल की जबरदस्त तैयारियां चल रही थीं। लाखों मजदूरों से संपर्क, सैकड़ों कार्यस्थल मीटिंग, पोस्टर, पर्चे और बैनरों के माध्यम से प्रचार किया गया। यह हड़ताल केवल मजदूरों के अधिकारों की नहीं, बल्कि देश को विनाशकारी कॉर्पोरेट नीतियों से बचाने की लड़ाई है।”
ठाकुर ने बताया कि इस हड़ताल की 17 सूत्री मांगों में चार श्रम संहिताओं की वापसी, न्यूनतम मजदूरी और सामाजिक सुरक्षा, ठेका प्रथा पर रोक, और सभी श्रमिकों के लिए स्थायी रोजगार की गारंटी शामिल हैं। यह हड़ताल न सिर्फ ट्रेड यूनियनों का आह्वान है, बल्कि किसानों, युवाओं, छात्रों और महिलाओं समेत सभी जन आंदोलनों का भी समर्थन इसे मिला है।
उन्होंने कहा कि “पहलगाम में 26 निर्दोष नागरिकों की हत्या के बाद भी मालिक वर्ग मजदूरों पर हमला जारी रखे हुए है। काम के घंटे बढ़ाए जा रहे हैं, न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा अधिकार छीने जा रहे हैं। सरकारें इस पर आंख मूंदे हुए हैं।”
अब 9 जुलाई को हड़ताल को बनाएं ऐतिहासिक: संयुक्त मंच
संयुक्त मंच ने झारखंड में निम्नलिखित निर्णय लिए हैं:
17 मई तक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर तारीख बदलाव की जानकारी सार्वजनिक करें।
जिन अधिकारियों को पहले नोटिस दिए गए थे, उन्हें नई तारीख से अवगत कराएं, और जहां नोटिस नहीं भेजा गया, वहां तुरंत नया नोटिस दें।
20 मई को सभी कार्यस्थलों, जिला मुख्यालयों, औद्योगिक क्षेत्रों में गेट मीटिंग, प्रदर्शन और लामबंदी करें, हड़ताल की मांगों और नई तारीख का प्रचार करें।
सभी यूनियनों को कहा गया है कि जिला स्तरीय समन्वय बैठकें करें, ताकि तारीख परिवर्तन की आवश्यकता और पृष्ठभूमि को सभी कार्यकर्ताओं तक पहुंचाया जा सके।
“सरकार और मालिकों को यह स्पष्ट संदेश देना होगा कि यह आंदोलन टलने वाला नहीं है। अगर मजदूरों की आवाज नहीं सुनी गई, तो 9 जुलाई की हड़ताल एक जनसुनामी बन जाएगी।”
संयुक्त मंच ने सरकार से मांग की है कि वह इस परिस्थिति का फायदा उठाकर किसी भी प्रकार की दमनकारी कार्रवाई से बाज आए, और भारतीय श्रम सम्मेलन बुलाकर मजदूरों की जायज़ मांगों पर वार्ता करे। आंदोलन को और मजबूत बनाने के लिए गहन जनसंपर्क, मीडिया प्रचार और जन लामबंदी को तेज करने का आह्वान किया गया है।

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