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कथारा: सीसीएल कोयला चोरी रोकने में नाकाम, छापेमारी के नाम पर हो रही है खानापूर्ति

कथारा: सीसीएल कोयला चोरी रोकने में नाकाम, छापेमारी के नाम पर हो रही है खानापूर्ति
वी भारती/कथारा
सीसीएल के सुरक्षा विभाग द्वारा कोयला चोरी रोकने में नाकाम साबित हो रही है. हालांकि कोयला चोरों के विरुद्ध हर दिन छापेमारी की जाती है, लेकिन कथारा क्षेत्रीय सुरक्षा विभाग द्वारा चलाए जा रहे छापामारी अभियान को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं. दरअसल रविवार को सुरक्षा विभाग के लोगों ने सवांग और जारंगडीह में छापेमारी की। इस दौरान मोटरसाइकिल पर लदे कोयला को जब्त किया गया, मगर कोयला चोरों भागने में सफल रहा। यह कार्य रोज होता है। सुरक्षा विभाग के गार्ड छापेमारी के बाद सिर्फ बाइक पकड़ते हैं। चोर भाग जाता है। जब्त बाइक को क्षतिग्रस्त कर अपना ड्यूटी पूरा कर लेते हैं. इससे लोगों के मन में संदेह उत्पन्न हो रहा है कि कहीं यह छापामारी अभियान केवल खानापूर्ति के लिए तो नहीं हो रहा है. सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं कि खदान से अवैध कोयला चोरी रुकने का नाम नहीं ले रहा है, जबकि लगातार छापामारी अभियान चलाया जा रहा है. क्या सीसीएल सुरक्षा विभाग का सूचना तंत्र कमजोर है? क्या कोयला चोरों का सूचना तंत्र सुरक्षा विभाग की टीम से अधिक मजबूत है, जिससे वे हर बार छापामारी से बच निकलते हैं?
चोरों को पकड़ने में असफलता क्यों?

क्या क्षेत्रीय सुरक्षा विभाग की टीम वास्तव में चोरों को पकड़ना नहीं चाहती है, इसलिए हर बार सिर्फ चंद कोयला और कुछ वाहन ही बरामद होते हैं? सवाल खड़े हो रहे हैं कि कोयला लदा मोटरसाइकिल पकड़ा जाता है लेकिन कोयला ले जाने वाला भाग जाता है.

अगर कोयला चोरी लगातार हो रही है, तो स्थानीय थाने में शिकायत क्यों नहीं की जाती और कोई मामला दर्ज क्यों नहीं होता? यदि पुलिस कोयला चोरी रोकने में सहयोग नहीं कर रहा है तो इसकी शिकायत सरकार के स्तर पर क्यों नहीं की जाती है? पकड़े गए मोटरसाइकिल नंबर के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर आरोपी तक पहुंचा जा सकता है. मगर सुरक्षा विभाग इससे बचती है.

इन सवालों का उत्तर न मिलने से संदेह की स्थिति बनी हुई है. क्या वास्तव में छापामारी अभियान प्रभावी है या केवल दिखावा के लिए किया जा रहा है.

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