ऑडिट के नाम पर हो रही खानापूर्ति? पंचायत योजनाओं के अंकेक्षण पर उठे सवाल
गोमिया
त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं जिला परिषद, पंचायत समिति एवं ग्राम पंचायत के वित्तीय वर्ष 2023-24 में संचालित विभिन्न केंद्र प्रायोजित योजनाओं एवं अन्य योजनाओं (केंद्रीय वित्त आयोग की राशि सहित) का एक निजी कंपनी के द्वारा अंकेक्षण इन दिनों प्रखंडों में किया जा रहा है।
पंचायती राज विभाग, झारखंड, रांची के निर्देश के आलोक में जिला परिषद, बोकारो के उप विकास आयुक्त-सह-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी द्वारा प्रखंडवार तिथियां निर्धारित की गई है। इसके तहत गोमिया में 19 फरवरी 2026 को अंकेक्षण कार्य संपन्न किया गया। अन्य प्रखंडों में बेरमो (20 फरवरी), नावाडीह (21 फरवरी) और चंद्रपुरा (23 फरवरी) को अंकेक्षण निर्धारित है।
अंकेक्षण कार्य के लिए जमशेदपुर की एक कंपनी को अधिकृत किया गया है।
हालांकि, गोमिया प्रखंड में अंकेक्षण के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि ऑडिट के नाम पर मात्र खानापूर्ति की गई। एक होटल में बैठकर उक्त कार्य किया गया, जिसका आरोप सामने आ रहा है कि कई योजनाओं की जमीनी स्थिति और अभिलेखों की गंभीरता से जांच नहीं की गई। वे पंचायत में गए ही नहीं।
कुछ जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों का कहना है कि यदि अंकेक्षण की प्रक्रिया की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। उनका आरोप है कि योजनाओं में खर्च हुई राशि और कार्य की गुणवत्ता का समुचित मिलान नहीं किया गया।
हालांकि, प्रशासन की ओर से अंकेक्षण प्रक्रिया को नियमानुसार संपन्न कराए जाने की बात कही जा रही है। संबंधित अधिकारियों का कहना है कि निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही कार्य किया जा रहा है।
अब देखना यह होगा कि उठ रहे सवालों पर जिला प्रशासन क्या रुख अपनाता है और क्या अंकेक्षण प्रक्रिया को लेकर आगे कोई अतिरिक्त जांच या समीक्षा की जाती है या महज उक्त कार्य खानापूर्ति कर समेट दिया जाएगा।
