बेरमो एसडीएम ने 21 अप्रैल को रखी त्रिपक्षीय वार्ता
रैयतों ने ओएनजीसी के खिलाफ आंदोलन की दी है चेतावनी
गोमिया
गोमिया प्रखंड अंतर्गत खुदगड़ा गांव के रैयतों ने ओएनजीसी जीसीएस प्लांट में स्थानीय युवाओं को नियोजन नहीं दिए जाने के खिलाफ 5 मई से अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी दी है।
इस संबंध में बेरमो एसडीएम मुकेश मछुआ ने 21 अप्रैल को अनुमंडल कार्यालय में त्रिपक्षीय वार्ता बुलाई है ताकि मामले का समाधान हो सके। इससे पहले रैयतों के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद से मुलाकात की थी और अपनी समस्याओं से अवगत कराया था। मंत्री ने एसडीएम को निर्देश दिया कि वे ओएनजीसी प्रबंधन के साथ बैठक कर रैयतों की समस्या का समाधान निकालें।
रैयतों का कहना है कि उन्होंने अपनी उपजाऊ जमीन ओएनजीसी को लीज पर दी थी, तब कंपनी ने स्थानीय लोगों को रोजगार में प्राथमिकता देने का वादा किया था। लेकिन सात वर्षों बाद भी उन्हें नियोजन नहीं मिला है।
उनका आरोप है कि ओएनजीसी में कार्यरत ठेका कंपनियां – दीप इंडस्ट्रीयल, सिमेस एनर्जी और गेनवेल कमिंस प्राइवेट लिमिटेड – झारखंड सरकार की 75% स्थानीय नियोजन नीति का उल्लंघन कर रही हैं। अब असम पेट्रोलियम लिमिटेड को नया ठेका मिला है, लेकिन उसमें भी रैयतों को रोजगार नहीं दिया जा रहा है।
रैयतों ने 3 अप्रैल को ओएनजीसी प्रबंधन को इस संबंध में आवेदन दिया था, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला। उनका कहना है कि यदि 5 मई तक उन्हें नियोजन नहीं दिया गया, तो वे जीसीएस प्लांट के मुख्य द्वार पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू करेंगे। एसडीएम से विधायक प्रतिनिधि अमित पासवान, रैयत नेहरू प्रजापति, गणेश यादव, रमेश प्रजापति और राजकुमार प्रजापति ने मिलकर अपनी समस्याओं से अवगत कराया हैं।
