झारखंड में महिला शिक्षकों के स्थानांतरण को लेकर नाराजगी, सामान्य वर्ग की महिलाओं को नहीं मिला मौका
डेस्क
झारखंड सरकार द्वारा शिक्षक स्थानांतरण नीति में हाल ही में किए गए संशोधन को लेकर राज्य की महिला शिक्षकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। पिछले स्थानांतरण प्रक्रिया में कुछ जिलों में सामान्य वर्ग की महिलाओं को स्थानांतरण का लाभ मिला था, लेकिन कई जिलों में उन्हें मौका नहीं दिया गया। इस असमानता के विरोध में कई महिला शिक्षिकाओं ने मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक और कल्पना सोरेन से मुलाकात कर अपने गृह जिले में स्थानांतरण की मांग की थी। तब सरकार ने आश्वासन दिया था कि सत्ता में वापसी के बाद सभी महिलाओं को स्थानांतरण का अवसर दिया जाएगा।
हालांकि, हालिया संशोधित स्थानांतरण नियमावली में सामान्य वर्ग की महिलाओं को शामिल न करते हुए केवल 50 वर्ष से अधिक आयु की महिलाएं, विधवा, तलाकशुदा, परित्यक्ता और एकल अभिभावक शिक्षिकाओं को ही स्थानांतरण की पात्रता दी गई है। इससे पहले शिक्षा मंत्री ने नियमों को और सरल बनाने की बात कही थी, परंतु नए संशोधन इसके उलट प्रतीत हो रहे हैं।
इस बदलाव के विरोध में राज्य भर की महिला शिक्षक सोशल मीडिया पर अभियान चला रही हैं और सरकार से सामान्य परिस्थिति की महिलाओं को भी स्थानांतरण का अवसर देने की मांग कर रही हैं।
संशोधित नियमावली की मुख्य बातें:
अब केवल 50 वर्ष से अधिक आयु वाली महिलाएं, विधवा, तलाकशुदा, परित्यक्ता और एकल अभिभावक महिला शिक्षिकाएं ही विशेष परिस्थिति में स्थानांतरण की पात्र होंगी।
पति/पत्नी अथवा संतान को असाध्य रोग होने की स्थिति में भी स्थानांतरण पर विचार किया जाएगा।
स्थानांतरण का निर्णय PTR (Pupil Teacher Ratio) प्रभावित न हो, इस शर्त पर आधारित होगा।
स्थानांतरण में अंकों के आधार पर प्राथमिकता दी जाएगी, जिसमें गंभीर रोग, दिव्यांगता और पति-पत्नी सरकारी कर्मचारी होने जैसे मामलों को वरीयता मिलेगी।
महिला शिक्षिकाओं ने सरकार से पुनर्विचार कर सामान्य महिलाओं को भी स्थानांतरण प्रक्रिया में शामिल करने की मांग की है।
